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जिंदगी एक किताब थी

किताबे काम न आयी जब जिंदगी इम्तिहान ले रही थी रोक न पायी कोई ताकत जब सांसे दामन छोड़ रही थी रंगीन सी दुनिया अंधेरो मे तब्दील हो गयी पर्दे गिरा कर आँखो के जब पलके बंद हो गयी रहा न कोई अपना न कोई पराया जब खुदा ने इस दुनिया से साथ छुड़ाया.. जब तक जिया खटका जिनकी आँखो मे मरते ही आँशु छलका उनकी भी आँखो मे एक के बाद एक ख्वाहिशो को पाना फिर भी न मिला जिंदगी का ठिकाना जब लाश पड़ी थी मेरी दो गज जमी पर एक दिन सब कुछ खाक मे मिलता है ये कहती मेरी राख पड़ी थी वही पर.. सारी उम्र शिकायतो मे उलझकर ये जिंदगी नही आसान समझकर जिंदगी जीने के लिए थी मैने ख्वाहिशो के नाम कर दी कुछ यू सुलझी सी जिंदगी मैने खुद ही बदनाम कर दी.. अभी हकीकत था अभी याद बन गया मरते ही देखो एक किताब बन गया जिंदगी एक किताब थी मैने जाना ही नही कभी एक पन्ना पीछे पलटू तो तकलीफे एक पन्ना आगे पलटू तो उलझने दिल के तार छुआ करती है मुस्कुरा कर जिया करु आज को तो जिंदगी खुशनुमा सी रहा करती है.. बिखराया करो अपनी मुस्कान हर एक पन्ने पर की तुम्हे पढ़कर मुस्कराये पढ़ने वाला इंसान भी तुम्हारी जिंदगी एक किताब थी जिसे पढेंगे लोग तुम्हारे मरने के बाद ही..!!

हो जाना

एक पेड़ जिसे आसमान होना था, हो गया । एक आसमान जिसे  पेड़ बनकर बिखरना था  रोना था ,  बिखर गया, रो लिया । कभी कभी जिंदगी में  जो होना चाहता है  वो कितनी आसानी से हो जाता है कभी कोई पेड़  बस पत्तो सा रहता हैं, कभी कोई आसमान  बस आसमान सा रहता है

सुबह-सुबह की बात

सुबह-सुबह की बात आज सुबह बरसों बाद मैंने खिड़की खोला और बाहर देखा, एक गिलहरी या मानो कोई साम्राज्ञी आँखे मटकाती, पूँछ घूमाती एकदम चौकन्नी सरपट दौड़ लगाती , फिर आराम के कुछ पल पेड़ के फल चबाती, उछलती, शर्माती दूर भाग जाती फिर मटक कर वापस आती गीत गाती नाचती, इतराती नखरे दिखलाती एक गिलहरी या फिर ज़िन्दगी आज सुबह जब मैंने खिड़की खोला । Writer L.B. MP 53

जीवन परिचय

जीवन परिचय --  जन्म   - मेरा नाम लाल बहादुर यादव है मेरा जन्म 12 दिसंबर सन 1999 में जिला सीधी शहर से लगभग 30 मील दूर एक बंजारी गांव में हुआ था, हमारे माता जी का नाम श्रीमती आशा यादव जी तथा हमारे पिताजी का नाम श्री सत्यभान यादव जी है, जोकि वह कंपनियों में ड्राइवर के तौर पर कार्य करते हैं, और हमारे एक बड़े भाई अजय कुमार यादव जी हैं ! शिक्षा -  हमारी शिक्षा का आरंभ हिंदी भाषा से शुरू हुई और अंग्रेजी तथा उर्दू की शिक्षा ली । और  जीवनयापन का शौक बचपन से ही लग गया। सत्र 2018 में मॉडल स्कूल हायर सेकेंडरी मझौली से हायर सेकेंडरी की परीक्षा पास किया तथा उसके उपरांत मैं विवेकानंद पैरामेडिकल कॉलेज शहडोल से DMLT fainal  किया ! ''तूफान आते हैं कश्तियां पलट जाती हैं कुछ लोग मर के भी अमर हो जाते हैं"                                   लेखक लाल बहादुर यादव                          जिला सीधी मध्य प्रदेश (भारत)     ...

मुझ पे तू एहसान कर दे

🥀तू अपनी मोहब्बत मेरे नाम कर दे बस इतना सा मुझपे तू एहसान कर दे🥀 🥀सिवा तेरे कुछ मैंने चाहा नहीं है खुदा से भी कुछ मैने मांगा नहीं है तुझे गीत ग़जलों में मैं गा रहा हूँ तेरे आगे मैं हाँथ फैला रहा हूँ🥀 🥀भले मुझको दुनिया में बदनाम कर दे तू अपनी मोहब्बत मेरे नाम कर दे सुबह को तू मिल मुझसे और शाम कर दे तू अपनी मोहब्बत मेरे नाम कर दे🥀 🥀दहकते हुए शोलों पे चल रहा हूँ तेरे इश्क़ की आग में जल रहा हूँ खुशी क्या है दुनिया में अंजान हूँ मैं सफर में गमों संग मैं हर पल रहा हूँ🥀 🥀ऐलान-ए-मुहब्बत सरेआम कर दे तू अपनी मोहब्बत मेरे नाम कर दे तू चाहे यहां मुझको नीलाम कर दे तू अपनी मोहब्बत मेरे नाम कर दे🥀 🙏✍️✍️WRITER L.B. MP 53✍️✍️🙏

वो कैसी औरतें थीं...

वो कैसी औरतें थीं... जो गीली लकड़ियों को फूंक कर चूल्हा जलाती थीं जो सिल पर सुर्ख़ मिर्चें पीस कर सालन पकाती थीं सुबह से शाम तक मसरूफ़, लेकिन मुस्कुराती थीं भरी दोपहर में सर अपना ढक कर मिलने आती थीं जो दरवाज़े पे रुक कर देर तक रस्में निभाती थीं पलंगों पर नफ़ासत से दरी-चादर बिछाती थीं बसद इसरार मेहमानों को सिरहाने बिठाती थीं  अगर गर्मी ज़्यादा हो तो रुहआफ्ज़ा पिलाती थीं जो अपनी बेटियों को स्वेटर बुनना सिखाती थीं  जो "क़लमे" काढ़ कर लकड़ी के फ्रेमों में सजाती थीं दुआएं फूंक कर बच्चों को बिस्तर पर सुलाती थीं अपनी जा-नमाज़ें मोड़ कर तकिया लगाती थीं कोई साईल जो दस्तक दे, उसे खाना खिलाती थीं पड़ोसन मांग ले कुछ तो बा-ख़ुशी देती-दिलाती थीं जो रिश्तों को बरतने के कई गुर सिखाती थीं मुहल्ले में कोई मर जाए तो आँसू बहाती थीं कोई बीमार पड़ जाए तो उसके पास जाती थीं  कोई त्योहार पड़ जाए तो ख़ूब मिलजुल कर मनाती थीं वह क्या दिन थे किसी भी दोस्त के हम घर जो जाते थे तो उसकी माँ उसे जो देतीं वह हमको खिलाती थीं मुहल्ले में किसी के घर अगर शादी की महफ़िल हो तो उसके घर के मेहमानों को अपने घर सुला...

वक़्त का क्या है, गुज़रता है, गुज़र जायेगा...

जो ख़ुशबू बनकर महकती हो साँसों को आज बहकने दो कल शायद इस सीने में, फ़क़त धुआँ रह जायेगा. वक़्त का क्या है, गुज़रता है, गुज़र जायेगा... ख्वाबों की तरह आती हो मूंद कर पलकें छूने दो कल शायद मर्ग-आग़ोश में, यहीं लम्हा रह जायेगा. वक़्त का क्या है, गुज़रता है, गुज़र जायेगा... जो हाथों मे तेरा हाथ है उम्र-सफ़र यूँही चलने दो कल शायद इन राहों पर, कोई तन्हा रह जायेगा. वक़्त का क्या है, गुज़रता है, गुज़र जायेगा... इन मासूम, नन्हे हाथों को आज गले से लिपटने दो कल शायद ये अक्स अपना, अपना कहाँ रह जायेगा. वक़्त का क्या है, गुज़रता है, गुज़र जायेगा... माना ख़ाक में मिल जाना है कुछ अपना छोड़ जाने दो कल शायद इन सितारों में, कहीं निशाँ रह जायेगा. वक़्त का क्या है, गुज़रता है, गुज़र जायेगा... ----------------------------------------

नए पुराने आशिक

नजरें चुरा कर क्यों देख रही हो नाम बदल कर क्यों खोज रही हो नयी मुहब्बत से क्या दिल्लगी नहीं है जो पुराने आशिक को सोच रही हो तेरा मुझे छोड़ जाना आसान लग रहा था मेरा प्यार तुमको एहसान लग रहा था अकेले का जीवन भी श्मशान है  मरने वाला भी नादान लग रहा था  बिना देखे ही तुझको प्यार कर लिए एक बार ना सही हजार बार कर लिए  नये लोगों से मिलने की तेरी आदत नहीं गयी  हम पुराने का सजदा हर बार कर लिये  जीवन का सफर अब तन्हाई न देगा  हजारों में अब तू सुनाई न देगा पुराने का ज़िक्र नये लोगों से न करना  क्या पता वो तुझे दिखाई न देगा 🙏✍️✍️WRITER L.B. MP 53✍️✍️🙏

होंठ

दिन भर तो मैं दुनिया के धंदों में खोया रहा जब दीवारों से धूप ढली तुम याद आए दिल धड़कने का सबब याद आया वो तिरी याद थी अब याद आया एक दम उस के होंट चूम लिए ये मुझे बैठे बैठे क्या सूझी ऐ दोस्त हम ने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी 🙏✍️✍️ WRITER L.B.MP53✍️✍️🙏

ना दिल में कोई बात छुपी

दोस्ती की ज़मीर पर हमने , ऐसा मंज़र बोया है , कि लगता हैं... अब जो भी हैं सब अपना है, ना शिकवा है किसी के रूठने का, ना गम है फिर से कभी टूटने का, है तो सिर्फ एक अनकही सी ख़ुमारी, ना दिल में कोई बात छुपी , ना लबो से कोई बात दबी , ना रहा तकलीफ का पहरा, ना ही है असमंजस का सेहरा , मुस्कान में हैं आशाओं का तेज़, और हल्का सा भी ना रहा हमें खुशियों से परहेज़। 🙏✍️✍️ WRITER L.B. MP 53✍️✍️🙏

क़िस्मत

क़िस्मत अजीब खेल दिखाती चली गई जो हँस रहे थे उन को रुलाती चली गई दिल गोया हादसात-ए-मुसलसल का शहर हो धड़कन भी चीख़ बन के डराती चली गई काग़ज़ की तरह हो गई बोसीदा ज़िंदगी तहरीर हसरतों की मिटाती चली गई मैं चाहती नहीं थी मगर फिर भी जाने क्यूँ आई जो तेरी याद तो आती चली गई आँखों की पुतलियों से तिरा अक्स भी गया या'नी चराग़ में थी जो बाती चली गई ढूँडा उन्हें जो रात की तन्हाई में 'हया' इक कहकशाँ सी ज़ेहन पे छाती चली गई 🙏✍️✍️WRITER L.B. MP 53 ✍️✍️🙏

क्या करूं मजबूरियां हैं

दावा ए मोहब्बत हम तो कर नहीं सकते और तेरे बगैर भी हम जी नहीं सकते, क्या करूं मजबूरियां की वज़ह तुझे क्या बताऊं तेरे बगैर भी हम जी नहीं सकते, आंधियों से कह दो मुझ पर जरा रहम करे तेरी खुशबू का झोंका हम सह नहीं सकते, मिटा दो अपनी यादों का इक इक कतरा जिन्हें दिल में रख कर हम सह नहीं सकते | 🙏✍️✍️WRITER L.B. MP 53✍️✍️🙏

आया है त्यौहार क्रिसमस का

आया है त्यौहार क्रिसमस  बाँटे सब को प्यार क्रिसमस  मैं लाया हूँ प्यारे तोहफ़े  देखो कितने सारे तोहफ़े  गुड़िया कैसी आली लाया  गुड्डा दाढ़ी वाला लाया  जिस के पास हों पैसे ले लो  जी चाहे तो वैसे ले लो  तोहफ़े पा कर सब बोलेंगे  आए यूँ हर बार क्रिसमस  बाँटे सब को प्यार क्रिसमस  रंगीले ग़ुब्बारे ले लो  गोया चाँद सितारे ले लो  चलती फिरती मोटर ले लो  ढोल बजाता बंदर ले लो  देखो आ कर ख़ूब तमाशा  आओ जाने आओ 'पाशा'  अगले साल मैं फिर आउँगा  जब आएगा यार क्रिसमस  बाँटे सब को प्यार क्रिसमस  🙏✍️✍️WRITER L.B. MP 53✍️✍️

ना तुमने कुछ कहा ना मैंने कुछ कहा

ना तुमने कुछ कहा ना मैंने कुछ कहा और खामोशी का समंदर भरता गया.. ना तुमने कुछ सुना ना मैंने कुछ सुना और दिलों का दर्द यूँ ही बढ़ता गया.. ना तुमने कुछ चुना ना मैंने कुछ चुना और सफ़र-ए-ज़िंदगी में कारवां जुड़ता गया.. ना तुमने कुछ बुना ना मैंने कुछ बुना और जज़्बातों के धागा यूँ ही कसता गया.. चलो तुम ही बताओ क्या और कहें हम कशिश-ए-रंग-ए-मोहब्बत यूँ ही चढ़ता गया.. ना तुमने कुछ कहा ना मैंने कुछ कहा

ऐ मुन्ने तू मुझे बता, तेरे क्या क्या सपने हैं

ऐ मुन्ने तू मुझे बता, तेरे क्या क्या सपने हैं कौन से हैं औरों ने चुने, और कौन से तेरे अपने हैं। कदम कदम पर लोग कहेंगे, क्या करना है क्या नहीं। इधर उधर की राह पकड़कर, भटक न जाना तू कहीं।   बाकी सबकी बातें छोड़, बात तू अपने दिल की सुन। तेरी मंज़िल जो रस्ता जाये, राह वही तू खुद से चुन। मछली को तुमने देखा है, क्या कभी पेड़ पर चढ़ते। या किसी बाज को तुमने पाया, कभी ऊँचाई से डरते। सबके अपने गुण दोष हैं, अपनी अपनी है शक्ति। प्रभु ने सबको कुछ ख़ास दिया, भिन्न है हर व्यक्ति। ना कर किसी से तुलना तू, मार्ग तेरा व गति भी तेरी। आशादीप जलाके रखना, मिले अगर कोई गली अँधेरी। बाधायें तो आयेंगी लेकिन, मन में होगा पूरा संतोष। स्वयं चुना था मार्ग अपना, नहीं किसी का कोई दोष। अगर पकड़ के राह दूसरी, है मंजिल मिल भी जाती। एक खालीपन रह जाता है, ना खुशी है सच्ची आती। एक जिंदगी मिलती सबको, क्यों इसको बर्बाद करें। अपने अनुसार जी लें इसको, व्यर्थ का क्यूँ विवाद करें। जिंदगी अगर एक चित्र है, तो तुझे ही इसे बनाना है। रंग जो लगते तुझको प्यारे, उनसे ही इसे सजाना है। 🙏✍️✍️WRITER L.B. MP 53✍️✍️🙏

मुझे उस पर भरोसा है

कोई मुझसे पूछे  वह तुम्हारे लिए क्या है  मैं कहूँगा : वह मेरी मुक्ति है  आज़ादी की तमन्ना  कभी खुली हवा  कभी उन्मुक्त झरना  कभी दहकती चट्टान  कभी प्यास  कभी तृप्ति  कभी मृग मरीचिका  कभी रसीले चुंबन  कभी अथाह यातना  कभी अपार सुख  कभी पर पीड़ा  कभी अनंत इंतज़ार  बन कर वह मुझसे लिपट जाती है  मैं उसकी देह के सुनहरे जंगल  में बार-बार गुम होता हुआ  लौटता हूँ सुरक्षित  नए जीवन की ओर  वह ऐसे मिलती है  जैसे धान के खेत की बगल में  अड़हुल का फूल अचानक दिखे  अपनी मोहक सुंदरता  से बेपरवाह  हवा में धीरे-धीरे हिलता हुआ  और ख़ुशी के मारे आप चिल्ला उठें  और उसकी ओर लपकें  अरे, तुम यहाँ!  मुझे उस पर भरोसा है  जैसे तीसरी दुनिया के सर्वहारा  और प्रगतिशील निम्र-पूँजीवादी बुद्धिजीवी को  मार्क्स और माओ पर 🙏✍️Writer L.B. MP 53✍️🙏

कभी खुद से भी मुलाक़ात कर लिया करो

कभी खुद से भी मुलाक़ात कर लिया करो कभी ख़ुद से भी बात कर लिया करो तन्हाई जब बहुत सताने लगे तुम्हें आईना अपने सामने रख लिया करो पढ़नी हो गर कोई खूबसूरत किताब हाले दिल कागज़ पे लिख लिया करो रोशनी के लिए पराये चिराग़ मत ढूँढों अपनी ही आग मे थोड़ा जल लिया करो जिंदगी की दौलत खुदा ने बख़्शी है कंजूसी से उसे खर्च मत किया करो 🙏✍️Writer L.B. MP 53✍️🙏

दोस्त मेरे

ज़िन्दगी जीने का जुदा जज़्बा जगाया दोस्त मेरे...... तूने हंसकर मुझको यूं गले से लगाया दोस्त मेरे...... जीवन में था न जाने कबसे पतझड़ का मौसम....... यारी ने इसे महकता गुलशन बनाया दोस्त मेरे....... रूठीं आशाओं से सूना पड़ा था मन का आंगन....... भरके रंग नये उम्मीदों के इसे सजाया दोस्त मेरे....... खोया हुआ सा था उजाला कहीं अंधेरी राहों में...... दोस्ती ने तेरी, विश्वास का दीप जलाया दोस्त मेरे...... मायूस होकर मुरझा रहीं थीं अरमानों की कलियां...... ख़ुशी में मेरी, अपनी खुशियों को खपाया दोस्त मेरे...... खाईं थीं ठोकरें दर-बदर भटकते हुए ज़माने की....... मुझ पराये को अपना मानकर अपनाया दोस्त मेरे....... मतलब के बिना कोई नहीं पूछता हाल किसी का....... तेरे एहसानों ने दोस्ती की हदों को हराया दोस्त मेरे...... 🙏✍️✍️WRITER L.B. MP 53✍️✍️🙏

ऐसा कोई मिला नहीं......

संभल जाता जीवन मगर सहारा कोई मिला नहीं....... हमें चाहने वाला दुनिया में हमारा कोई मिला नहीं.......  कमी तो न थी रंगों की, बागों के महकते जहान में....... पर ये नज़रों को भाए ऐसा नज़ारा कोई मिला नहीं...... बहते ही चले गए जवां वक्त के इस तेज़ दरिया में........ बचा ले जो बहाव से ऐसा किनारा कोई मिला नहीं....... यूं तो अनगिनत दिखते हैं चमकते तारे आसमां में........ क़िस्मत को चमकाए ऐसा सितारा कोई मिला नहीं....... फ़िज़ा में फैलीं जा रहीं थीं हसीं आंखों की अदाएं........ पर हमें समझ में आए ऐसा इशारा कोई मिला नहीं....... खरीद लेते मुहब्बत की मुद्रा से खुशियां थोड़ीं सीं........ पर बेचने को हो राज़ी ऐसा बंजारा कोई मिला नहीं....... तड़प रहा हो जो कब से सच्ची दौलत पाने के लिए........ अमीर आशियानों में ऐसा दुखियारा कोई मिला नहीं....... 🙏✍️✍️ WRITER L.B. MP 53 ✍️✍️🙏

आज वह मेरा छोटा सा बचपन बहुत याद आता है

देखिए विज्ञान हमें कहां से कहां ले आया पहले कुवे का मेला पानी पीकर भी 100 वर्ष तक जी लेते थे, पहले अब आरो का शुद्ध पानी पीकर भी 40 वर्ष में ही बूढ़ हो जाते हैं । पहले हम वह घानी का मेला तेल खाकर बूढ़े होकर भी मेहनत कर लेते थे, अब हम डबल ट्रिपल फिल्टर तेल खाकर भी जवानी में हाफ देते हैं पहले हम तो वह डाले वाले नमक खाकर भी बीमार ना पढ़ते थे अब तो शुद्ध आयोडीन नमक खाकर भी हाई लो बीपी शुगर लेकर पड़े हैं पहले वहां नीम बबूल नमक से दांत चमकाते थे तब भी चबा चबा कर खाते थे अब नमक वाली कोलगेट हैं फिर भी रोज डेंटिस्ट के चक्कर लगाते हैं पहले वह नाड़ी पकड़ कर रोक बता देते थे अब 10 जांच करने की पर भी रोग नहीं जान पाते पहले वह 78 बच्चे पैदा करने वाली मां 80 वर्ष की अवस्था में खेत काम का करती थी अब पहले ही महीने से डॉक्टर की देखरेख में रखते हैं फिर भी बच्चे पेट फाड़कर जन्म लेते हैं पहले काले गुड़ की मिठाईयां दबा दबा कर खा जाते थे अब तो खाने से पहले ही शुगर की बीमारी हो जाती है पहले बुजुर्गों के घुटने नहीं दुख ते थे अब जवान भी घुटनों और कंधों के दर्द से कहराता है यह समझ नहीं आता कि यह विज्ञान का युग है ...

कविता : इंसान ( इंसान की कहानी )

कविता:इंसान(इंसान की कहानी) इंसान बुरा नहीं होता है बस सोच को बुरी रखता है दूसरे इंसान को ज्यादा मिलता देखकर वो ही गलत रास्ते पर चलता है खुशियों से जलता है दूसरों की उनकी बर्बादी के बारे में सोचता है मन ही मन में खुद कुढ़कर उनकी बराबरी करने की सोचता है मार्ग सही नहीं चुनता वो बस ज़िद पर अडिग रहता है अपने अंदर से इंसानियत को मारकर वो कभी खुश नहीं रहता है रूठा रहता है बेवजह वो अपने रिश्तों को तोड़कर छोड़ देता है अपनों को वो अपना दुश्मन समझकर मिला है जितना उसे उसमें खुश नहीं रहता है सच्चाई के रास्ते को झुठला कर वो लालच के भंवर में फंसता है

मैं बैठा मंदिर बीच जमीन

आई आफत आबरू पर मान, ना सूझे कछु अक्ल बुद्धिमान, मै हुआ अधीर व्याकुल औ बेचैन, ज़िस्त तहजीब की हुई तौहीन, मैं बैठा मंदिर बीच जमीन !! मैं असीर हूं अस्का़म का, पकड़ा आंचल अजमाईस का, छोड़ ना ज्वाला मुझे बुराई का, बेकसूर बैठा कवि जगहीन, मैं बैठा मंदिर बीच जमीन !! फ़ुवाद से जोड़े हाथ शिव के समीप, लिए आगोश अबे चश्म के, करत माफी की गुहार सजदा के द्वार, शिव सुनी के तिफ़्ल फरमीन, मैं बैठा मंदिर विच जमीन !! दिए जवान तिफ़्ल बे जवान का, दिए शीश दुआ जग सम्मान का, कवि L.B. Yadav देखी लीला हुआ भगवान के अधीन, मैं बैठा मंदिर बीच जमीन !!

आसमा से क्या है नाता

आसमा से क्या है नाता आसमां में है चंदा आसमां मैं है तारे आसमां में ही है हमारे पूरे जग सितारे आसमां में है अफताब हमारे आसमा से क्या है नाता आसमा से ही हों दिन आसमा से हों रात आसमां में ही हों राहू आसमां में ही हो केतु आसमा से क्या है नाता आसमा ही सहती है चंद्र ग्रहण आसमा ही सहती है सूर्य ग्रहण आसमा में ही लड़े बादल आसमां से ही निकले बिजली आसमा से क्या है नाता आसमां में ही रहती आकाशगंगा आसमां में ही रहती निहारिका आसमां में ही रहती निगाहें आसमां में ही रहती चाहतें आसमा से क्या है नाता आसमा है पिता का प्यार आसमा है बड़े भाई का दुलार आसमा है छोटी बहन का गुहार आसमा है बड़ी बहन का संस्कार आसमा से क्या है नाता

कई बार हम कहना चाहते हैं

कई बार हम कहना चाहते हैं बहुत कुछ पर कह नहीं पाते , कितने वाक्य कितने वार्तालाप जैसे उमड़ते रहते हैं हृदय में, पर या तो अधरों पर आ नहीं पाते, या फिर आते हैं मात्र कुछ महज औपचारिक शब्द, उससे बिल्कुल अलग जो हम चाहते थे कहना। जो अभिव्यक्ति नहीं हो पाती अधरों से , जो बातें हम नहीं कह पाते उतर आती हैं कभी सफेद पन्नों पर , कभी मोबाईल के धड़कते हुए की बोर्ड से कर लेती हैं यात्राएं. आभासी दुनिया की भीड़ तक। कई बार बस इतनी सी चाह जागती है कि कोई बस इतना कह दे कहते रहो हम पढ़ रहे हैं कहते रहो हम सुन रहे हैं बस किसी का इतना कहना भर दे जाता है कितनी सांत्वना। पता नहीं क्यों कितनी बार लगता है जैसे कोई कह रहा है कुछ मांग रहा थोड़ी आश्वस्ति चाहता है थोड़ा ध्यान वैसे ही जैसे चाहता हूं मैं । जो कह नहीं सकते अधरों से सो चलो कह देते हैं शब्दों में, कहती रहो सुन रहा हूं मैं, लिखती रहो पढ़ रहा हूं मैं, समझ रहा हूं मैं महसूस कर रहा हूं मैं। तुम्हारी जिज्ञासाएं पहुंचतीं हैं मुझ तक, तुम्हारी पीडा़एं पहुंचती हैं मुझ तक, तुम्हारी प्रेरणाएं पहुंचती हैं मुझ तक, तुम्हारी कामनाएं पहुंचती हैं मुझ तक, तुम्हारे स्वर पहुंचते...

पापा आप गए सब कुछ गया

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पापा आप गए सब कुछ गया  नींद गईं चैन गया, सपने गए , बचपन गया, भरोसा गया, सर से आपका छांव गया, प्रेम का वह भाव गया। हम चार में सिमट गया संसार, पर मां का था बहुत आभार, प्यार करती है बेशुमार बड़े भाई ने दिया आप जैसा ही प्यार, घर सुना आंगन सुना था, मां का दुःख तो चार गुना था, बड़े भाई का कोई दर्द न जाने, कोई नहीं है कहने वाला,  बेटा क्यूं चिंता करता है, अभी तो तेरा बाप जिंदा है। जाने कैसा कैसा समय है आया, फिर भी हमने समय बिताया, याद आपकी जो आतीं हैं, मन छन्नी कर जाती है। तुम्हारे चरणों में संसार, हर बेटे का पहला प्यार, पिता की जगह कोई न लेगा, इतना प्यार और कौन देगा। मेरी तो आंखें बहती है,  रोक लेना अपने सैलाब। आप गए सब कुछ गया, नींद गईं, चैन गया। आपका बेटा अठारह साल का हो गया है, थोड़ी नहीं बहुत समझदार हो गया है।। मां की जुबानी हमारा बेटा अठारह साल का हो गया है, थोड़ी नहीं बहुत समझदार हो गया है।। पूछने पर किस को करता हो प्यार ज्यादा कहता है मम्मी और पापा दोनो को देखा बातों को घुमाना सीख गया है।। हमारा बेटा अब अठारह साल का हो गया है।। हर बार आते जाते , क...

भूल गए अब वो लोग

भूल गए अब वो लोग जो कभी अपने हुआ करते थे भूल गए वो अब सारी बातें जो हमसे बताते थे अपने दिलों का राज जो कभी हमसे नहीं छुपाते थे रूपये-पैसे का मोह उन्हें दूर ले गया सबसे यादें रह गई उनकी जो संजोई थी सबने मिलके भूल गए अब वो लोग रिश्तों की अहमियत को भूल गए अब वो लोग अपनों के अपनेपन को 🙏✍️Writer L.B. MP 53✍️🙏

शिद्दत से

दूसरों को देखने के बहाने देखा उसने  हमें ना देखने की कसम खा राखी थी जिसने इतनी शिद्दत से छुआ भी नहीं था किसी ने  जिस शिद्दत से किसी और को चूमा उसने 🙏✍️Writer L.B. MP 53✍️🙏

चाचु तूम आगे-आगे चलो।

बहुत भागने को मन करता चाचु तूम पीछे-पीछे आओ, बहुत दौड़ने को दिल करता चाचु तूम आगे-आगे चलो। बहुत सुनने को मन करता चाचु तूम कथा सुहानी कहते जाओ, आँख मूँदने को दिल करता चाचु तूम थपकी अनवरत देते जाओ। पीछे देखूँ, तुझको पाऊँ विश्वास अटूट तुझमें खोजूँ, आगे देखूँ, तुझसे सीखूँ कदम बढ़ाकर आगे जाऊँ। नभ पर तेरा चित्र खिचूँ हर सुबह जैसी तुझको पाऊँ, गंगा जल में हाथ लगाऊँ चाचु तुमको मैं उसमें पाऊँ।

दर्द है आग है पानी न पिलाया जाए ।

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दर्द है आग है पानी न पिलाया जाए । यह चढ़ती जवानी है जवानी से मिलाया जाए । ख़्वाब सीने में हैं मसगूल आंख रोती है । चाॅंदनी रात है इसे चाॅंद दिलाया जाए । रोज रोता है यह तन्हा मुसाफिर यारो । इसे मेरी बज़्म-ए-सुखन में लाया जाए । तोड़ा है जिस मासूका ने बेख़ौफ हो के दिल इसका। फरमान है उस प्रियसी को शूली पर चढ़ाया जाए। जलता है आज आदमी गैरों के प्रेम से । खुद का नाजायज प्रेम भी फिर क्यों छिपाया जाए। हक है सभी को इश्क़ मोहब्बत का यारो । जब दिल लगे दिल से तो दिल से निभाया जाए । 🙏✍️ Writer L.B. MP 53 ✍️🙏

जिंदगी एक खेल है ,

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जिंदगी एक खेल है , कठिनाइयों का मेल है| जीतोगे तो खुशी मिलेगी, हारोगे तो दुख भरी मिलेगी| जीतना सीखो हारना नहीं, यह जिंदगी हो जाएगी सही| जो जिंदगी से हार ना एक रास्ता चुनते है, वह नहीं जानता की कठिनाइयों का रास्ता बुनते है| जिंदगी से डरना नहीं, जिंदगी हो जाएगी सही| डराना तो जिंदगी का काम है, इस दुनिया में बड़े बड़ों का नाम है| क्या उन्होंने जिंदगी झेली नहीं होगी, पर जीते भी होगी| 🙏✍️Writer L.B. MP 53✍️🙏

नजारा कुछ युं ही ना था देखा मैने !!!

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नजारा कुछ युं ही ना था देखा मैने !!! बहारो के घटाओं मे चलती फिज़ायें,  पत्ती से मचलती खेलती जायें,  डलीयां यूं आपस मे लड़ती जायें,  पेड़ हिलता जाए जौं इन्सान, नजारा कुछ युं ही ना था देखा मैने !!! किनारे लगी थी दलदली सी नमीयें,  नमी पे उभरी थी गुदलीयों की हरीयालीयों, हरीयालीयों से झगड़ती चुसती रस तितलीयां, यूं मुस्कराती गीत गुनगुनाती जायें, नजारा कुछ युं ही ना था देखा मैने !!! ठहरे हुये पानी में शौक से तरंग,  जौं क्षीणीं हों आपास मे जंग, हमने पत्थर फेंका प्यार के इरादों से, नीले नीर से निकाली आवाज़ें,  जिनमें थी आपनों कि चाहतें,  नजारा कुछ युं ही ना था देखा मैने !!!  ग्रीष्म ऋतु मे तपती जज्बातें रेतों कि, कड़क धूप से चमके पत्थर निकालें लै,  प्रेमी कवि बैठा रेत के जलती शुर्खीयों पे,  नजारा कुछ युं ही ना था देखा मैने !!!  नजारा कुछ युं ही ना था देखा मैने !!! 🙏✍️Writer L.B. MP 53✍️🙏

प्रेम क्या है

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प्रेम भक्ति है तो प्रेम शक्ति भी है प्रेम बंधन है तो प्रेम मुक्ति भी है प्रेम ज्ञान है तो प्रेम अज्ञान भी है प्रेम जान है तो प्रेम सम्मान भी है प्रेम कठोर है तो प्रेम मृदुल भी है प्रेम शांत है तो प्रेम विह्वल भी है प्रेम कठिन है तो प्रेम सरल भी है प्रेम सघन है तो प्रेम विरल भी है प्रेम हार है तो प्रेम जीत भी है प्रेम राग है तो प्रेम गीत भी है प्रेम गर्म है तो प्रेम सर्द भी है प्रेम खुशी है तो प्रेम दर्द भी है प्रेम दिया है तो प्रेम बाती भी है प्रेम बेसुध है तो प्रेम पाती भी है प्रेम दृश्य है तो प्रेम अदृश्य भी ही प्रेम स्पृश्य है तो प्रेम अस्पृश्य भी है प्रेम स्वार्थ है तो प्रेम समर्पण भी है प्रेम भाव है तो प्रेम अर्पण भी है प्रेम जरूरत है तो प्रेम इच्छा भी है प्रेम परीक्षा है तो प्रेम प्रतीक्षा भी है 🙏✍️Writer L. B. MP 53✍️🙏