कविता:इंसान(इंसान की कहानी)
इंसान बुरा नहीं होता है
बस सोच को बुरी रखता है
दूसरे इंसान को ज्यादा मिलता देखकर
वो ही गलत रास्ते पर चलता है
खुशियों से जलता है दूसरों की
उनकी बर्बादी के बारे में सोचता है
मन ही मन में खुद कुढ़कर
उनकी बराबरी करने की सोचता है
मार्ग सही नहीं चुनता वो
बस ज़िद पर अडिग रहता है
अपने अंदर से इंसानियत को मारकर
वो कभी खुश नहीं रहता है
रूठा रहता है बेवजह वो
अपने रिश्तों को तोड़कर
छोड़ देता है अपनों को वो
अपना दुश्मन समझकर
मिला है जितना उसे
उसमें खुश नहीं रहता है
सच्चाई के रास्ते को झुठला कर
वो लालच के भंवर में फंसता है
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