मैं बैठा मंदिर बीच जमीन

आई आफत आबरू पर मान,
ना सूझे कछु अक्ल बुद्धिमान,
मै हुआ अधीर व्याकुल औ बेचैन,
ज़िस्त तहजीब की हुई तौहीन,
मैं बैठा मंदिर बीच जमीन !!

मैं असीर हूं अस्का़म का,
पकड़ा आंचल अजमाईस का,
छोड़ ना ज्वाला मुझे बुराई का,
बेकसूर बैठा कवि जगहीन,
मैं बैठा मंदिर बीच जमीन !!

फ़ुवाद से जोड़े हाथ शिव के समीप,
लिए आगोश अबे चश्म के,
करत माफी की गुहार सजदा के द्वार,
शिव सुनी के तिफ़्ल फरमीन,
मैं बैठा मंदिर विच जमीन !!

दिए जवान तिफ़्ल बे जवान का,
दिए शीश दुआ जग सम्मान का,
कवि L.B. Yadav देखी लीला हुआ भगवान के अधीन,
मैं बैठा मंदिर बीच जमीन !!

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