क्या करूं मजबूरियां हैं

दावा ए मोहब्बत हम तो कर नहीं सकते और तेरे बगैर भी हम जी नहीं सकते,
क्या करूं मजबूरियां की वज़ह तुझे क्या बताऊं तेरे बगैर भी हम जी नहीं सकते,
आंधियों से कह दो मुझ पर जरा रहम करे तेरी खुशबू का झोंका हम सह नहीं सकते,
मिटा दो अपनी यादों का इक इक कतरा जिन्हें दिल में रख कर हम सह नहीं सकते |
🙏✍️✍️WRITER L.B. MP 53✍️✍️🙏

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