होंठ
दिन भर तो मैं दुनिया के धंदों में खोया रहा
जब दीवारों से धूप ढली तुम याद आए
दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तिरी याद थी अब याद आया
एक दम उस के होंट चूम लिए
ये मुझे बैठे बैठे क्या सूझी
ऐ दोस्त हम ने तर्क-ए-मोहब्बत के बावजूद
महसूस की है तेरी ज़रूरत कभी कभी
🙏✍️✍️ WRITER L.B.MP53✍️✍️🙏
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