ना दिल में कोई बात छुपी

दोस्ती की ज़मीर पर हमने ,
ऐसा मंज़र बोया है , कि लगता हैं...
अब जो भी हैं सब अपना है,
ना शिकवा है किसी के रूठने का,

ना गम है फिर से कभी टूटने का,
है तो सिर्फ एक अनकही सी ख़ुमारी,
ना दिल में कोई बात छुपी ,
ना लबो से कोई बात दबी ,

ना रहा तकलीफ का पहरा,
ना ही है असमंजस का सेहरा ,
मुस्कान में हैं आशाओं का तेज़,
और हल्का सा भी ना रहा हमें खुशियों से परहेज़।
🙏✍️✍️ WRITER L.B. MP 53✍️✍️🙏

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