प्रेम क्या है
प्रेम भक्ति है तो प्रेम शक्ति भी है
प्रेम बंधन है तो प्रेम मुक्ति भी है
प्रेम ज्ञान है तो प्रेम अज्ञान भी है
प्रेम जान है तो प्रेम सम्मान भी है
प्रेम कठोर है तो प्रेम मृदुल भी है
प्रेम शांत है तो प्रेम विह्वल भी है
प्रेम कठिन है तो प्रेम सरल भी है
प्रेम सघन है तो प्रेम विरल भी है
प्रेम हार है तो प्रेम जीत भी है
प्रेम राग है तो प्रेम गीत भी है
प्रेम गर्म है तो प्रेम सर्द भी है
प्रेम खुशी है तो प्रेम दर्द भी है
प्रेम दिया है तो प्रेम बाती भी है
प्रेम बेसुध है तो प्रेम पाती भी है
प्रेम दृश्य है तो प्रेम अदृश्य भी ही
प्रेम स्पृश्य है तो प्रेम अस्पृश्य भी है
प्रेम स्वार्थ है तो प्रेम समर्पण भी है
प्रेम भाव है तो प्रेम अर्पण भी है
प्रेम जरूरत है तो प्रेम इच्छा भी है
प्रेम परीक्षा है तो प्रेम प्रतीक्षा भी है
🙏✍️Writer L. B. MP 53✍️🙏
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