ना तुमने कुछ कहा ना मैंने कुछ कहा
ना तुमने कुछ कहा ना मैंने कुछ कहा
और खामोशी का समंदर भरता गया..
ना तुमने कुछ सुना ना मैंने कुछ सुना
और दिलों का दर्द यूँ ही बढ़ता गया..
ना तुमने कुछ चुना ना मैंने कुछ चुना
और सफ़र-ए-ज़िंदगी में कारवां जुड़ता गया..
ना तुमने कुछ बुना ना मैंने कुछ बुना
और जज़्बातों के धागा यूँ ही कसता गया..
चलो तुम ही बताओ क्या और कहें हम
कशिश-ए-रंग-ए-मोहब्बत यूँ ही चढ़ता गया..
ना तुमने कुछ कहा ना मैंने कुछ कहा
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