दर्द है आग है पानी न पिलाया जाए ।
दर्द है आग है पानी न पिलाया जाए ।
यह चढ़ती जवानी है जवानी से मिलाया जाए ।
ख़्वाब सीने में हैं मसगूल आंख रोती है ।
चाॅंदनी रात है इसे चाॅंद दिलाया जाए ।
रोज रोता है यह तन्हा मुसाफिर यारो ।
इसे मेरी बज़्म-ए-सुखन में लाया जाए ।
तोड़ा है जिस मासूका ने बेख़ौफ हो के दिल इसका।
फरमान है उस प्रियसी को शूली पर चढ़ाया जाए।
जलता है आज आदमी गैरों के प्रेम से ।
खुद का नाजायज प्रेम भी फिर क्यों छिपाया जाए।
हक है सभी को इश्क़ मोहब्बत का यारो ।
जब दिल लगे दिल से तो दिल से निभाया जाए ।
🙏✍️ Writer L.B. MP 53 ✍️🙏
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