आज वह मेरा छोटा सा बचपन बहुत याद आता है

देखिए विज्ञान हमें कहां से कहां ले आया
पहले कुवे का मेला पानी पीकर भी 100 वर्ष तक जी लेते थे,
पहले अब आरो का शुद्ध पानी पीकर भी 40 वर्ष में ही बूढ़ हो जाते हैं ।

पहले हम वह घानी का मेला तेल खाकर बूढ़े होकर भी मेहनत कर लेते थे,
अब हम डबल ट्रिपल फिल्टर तेल खाकर भी जवानी में हाफ देते हैं

पहले हम तो वह डाले वाले नमक खाकर भी बीमार ना पढ़ते थे अब तो शुद्ध आयोडीन नमक खाकर भी हाई लो बीपी शुगर लेकर पड़े हैं

पहले वहां नीम बबूल नमक से दांत चमकाते थे तब भी चबा चबा कर खाते थे अब नमक वाली कोलगेट हैं फिर भी रोज डेंटिस्ट के चक्कर लगाते हैं

पहले वह नाड़ी पकड़ कर रोक बता देते थे अब 10 जांच करने की पर भी रोग नहीं जान पाते

पहले वह 78 बच्चे पैदा करने वाली मां 80 वर्ष की अवस्था में खेत काम का करती थी अब पहले ही महीने से डॉक्टर की देखरेख में रखते हैं फिर भी बच्चे पेट फाड़कर जन्म लेते हैं

पहले काले गुड़ की मिठाईयां दबा दबा कर खा जाते थे अब तो खाने से पहले ही शुगर की बीमारी हो जाती है

पहले बुजुर्गों के घुटने नहीं दुख ते थे अब जवान भी घुटनों और कंधों के दर्द से कहराता है
यह समझ नहीं आता कि यह विज्ञान का युग है या अज्ञान का

घर में सबसे पहले गाय की कुकुर की पंछियों की बहुत सारे मेहमानों की रोटी से बनती थी फिर भी घर का बजट संतुलित रहता था ना जाने क्यों

महिलाओं के लिए जिम या कसरत के विशेष साधन नहीं थे लेकिन फिर भी महिलाएं पूर्णता स्वस्थ रहती थी ना जाने क्यों

घर कच्चे होते थे कमरे कम रहते थे लेकिन मां-बाप कभी वृद्धा आश्रम नहीं जाते थे ना जाने क्यों

जितने खिलौने आज बच्चों के पास है उनसे नहीं होते थे फिर भी हर खेल बहुत आनंदित होता था ना जाने क्यों
यह उन दिनों की बात है जब सोशल मीडिया नहीं हुआ करता था

यह वह अनमोल बातें हैं जिन्हें हम कभी नहीं भुला सकते हैं वह जमाना ही यू कुछ और था भुलाए नहीं भूलता
आज वह मेरा छोटा सा बचपन बहुत याद आता है
🙏✍️Writer L.B. MP 53✍️🙏

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