ऐसा कोई मिला नहीं......

संभल जाता जीवन मगर सहारा कोई मिला नहीं.......
हमें चाहने वाला दुनिया में हमारा कोई मिला नहीं....... 

कमी तो न थी रंगों की, बागों के महकते जहान में.......
पर ये नज़रों को भाए ऐसा नज़ारा कोई मिला नहीं......

बहते ही चले गए जवां वक्त के इस तेज़ दरिया में........
बचा ले जो बहाव से ऐसा किनारा कोई मिला नहीं.......

यूं तो अनगिनत दिखते हैं चमकते तारे आसमां में........
क़िस्मत को चमकाए ऐसा सितारा कोई मिला नहीं.......

फ़िज़ा में फैलीं जा रहीं थीं हसीं आंखों की अदाएं........
पर हमें समझ में आए ऐसा इशारा कोई मिला नहीं.......

खरीद लेते मुहब्बत की मुद्रा से खुशियां थोड़ीं सीं........
पर बेचने को हो राज़ी ऐसा बंजारा कोई मिला नहीं.......

तड़प रहा हो जो कब से सच्ची दौलत पाने के लिए........
अमीर आशियानों में ऐसा दुखियारा कोई मिला नहीं.......
🙏✍️✍️ WRITER L.B. MP 53 ✍️✍️🙏

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