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हदसा

हमारे शहर में एक मोची था जिससे मै पहली बार मिला था और मिलते ही वो मेरे दिल में छा गया मै - भाई कितना कमा लेते हो मोची - कुछ नहीं भाई घर का खर्चा भी नहीं चलता मोची ही  - देखता हूं बाहर जाऊंगा चंद पैसे कमाउंगा मां के जो गहने गिरवी हैं उनको भी छुड़ाऊगा जो लोगों से उधार ले रखा है उसे भी चुकाऊंगा फिर वो अगले ही दिन आपने एक बैग में कुछ कपड़े डाला मां के पैरों को छुआ और आपने ख्वाहिशों को दिल में दफन करके घर से निकल चला शहरों मे कमाने के लिए और अगले ही दिन में भी जा रहा था एक शहर की ओर जहां में पढ़ाई करने के वास्ते जा रहा था तो मुझे वह मोची स्टैंड पर ही मिला मोची - अरे भाई आप कहां जा रहे हो मै - बस यार जा रहा हूं कॉलेज मोची - चलो यार कम से कम कुछ दूर तक के तो साथी मिल गए पता नहीं आगे कोई मिलता है या भी नहीं पहचान का मोची की बातों मे मुझे बहुत ही मासूमियत झलक रही थी और उसकी बातें भी बड़ी निराली थी सच्ची में और उससे बातें करते-करते पता नहीं कब हमारा. बस स्टैंड आ गया वहीं से उसे रेलवे स्टेशन जाना था और मुझे भी अपने कमरे पे जाना था. मुझे और उसका मन नहीं भरा तो एक आधे घंटे उसके साथ बातें किया फि...

एक अंगूठी

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सोचा ना था कभी इश्क करूंगा तो अतीत नहीं बनूंगा सॉन्ग जीलूंगा संग संग मरूंगा ना शिकवा ना शिकायत सिर्फ और सिर्फ मोहब्बत करूंगा एक अंगूठी प्रेम कहानी की बुनियाद मैं रखूंगा मुझे यूं भी डर लगता था 🙏✍️Writer L.B. MP 53✍️🙏

हाँ प्यार करता हूँ ना मैं

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हाँ प्यार करता हूँ ना मैं !!! नैंन नसीली पलकें हों झुकी, उन आँखों मे शामिल मिली झील, तितलीयों सी मड़राती भौं, आँखों में दिन रात सी ढलती पलकें,  हाँ प्यार करता हूँ ना मैं !!! लबों में शामिल हों मुस्कान, उन होंठों में मिली गुलाब सी चाहत, ओ चाहत में थी हल्की सी मोहब्बत, मोहब्बत के पार तो था बस एक विश्वास, हाँ प्यार करता हूँ ना मैं !!! कानों में लड़खाड़ती हों बाली, बालीं से झगड़ती यें फिज़ायें, फ़िज़ओ से मिली घटायें, हाँ प्यार करता हूँ ना मैं !!!   हाँ प्यार करता हूँ ना मैं बालें लटकती हों वट सी लट, वो लटों में शामिल हों लेस, उन केस को समेटती हमेशा वो पट्टी, जिसमें सदैव बालें रहती हैं लिपटी, हाँ प्यार करता हूँ ना मैं !!! हाँ प्यार करता हूँ ना मैं कुतुम्ब सी गर्दन मे हैं चंद्रमा की लाकेट, उस लाकेट मे थी हमारी मन्ते, ये मन्ते ले आया था नज्मों कि नगरीयोँ से, वो हर नगरी थी दसों दिशाओं पे,  हाँ प्यार करता हूँ ना मैं !!! 🙏✍️Writer L.B. MP 53✍️🙏

शादी की सालगिरह पर सुंदर कविता

हां बड़ी है अपने मां के गोद में और खेली है पिता के छांव में हर मांग पुरी कराती बहने भाइयों के साथ संग खेली  सहेलियो के संग कि आँख मिचोलि नाचते गाते हो गई ब्याह के ढंग 8 मई 2017 को हल्दी में गई रंग बड़े हर्ष उल्लास से बैठी अपने पति के संग जगमगाती रही रोशनी अंबर और गगन मात-पिता के तहजीब औ तोहीन की आदर्श जोड़ी बनी रहे ऐसे ही करे सचिन सजदा कवि को दी भतीजी खेले हमेसा हसदा दया प्रेम स्नेह कि रखती तू प्यादा इस शादी की सालगिरह पर, आपको दिल से बधाई देते हैं,

एक नहीं हर साल दिवाली आती है ।

एक नहीं हर साल दिवाली आती है । मानो तो हर रोज दिवाली आती है । मां लक्ष्मी का प्रकोप सदा रहती है । तभी तो हर घर में एक नई सी रौनक रहती है ।। प्रेम की धारा पल-पल में बरसती है । संपूर्ण मुसीबतों में इनकी निगाहें बस्ती है । मां की ममता अश्कों के मोती से निखरती है । यही मोती तो धन की वर्षा होती है ।। राम लौटे, रावण लंका द्वार से । अयोध्या सजी, एक सीता के प्यार से । मर्यादा लौटी, लौटी अयोध्या की संस्कार । लोग संग हुए प्रफुल्लित सा परिवार । बजे ताल मृदंगा हर पर्वत औ पठार । नाचे गाए झुमें हर जग औ संसार । तभी से हुआ निर्माण दीपावली का त्यौहार ।। मां धरती को ना कोड़ा जाए । मां धरती को ना कोड़ा जाए । मिट्टी के दीप नहीं, बल्कि आटे का दीप जलाया जाए ।। मां धरती को नाकोड़ा जाए । मां धरती को नाकोड़ा जाए ।। ना हाथों से ना फिजाओं में पटाखे फोड़ा जाए । पटाखों से खुद और दूसरों को भी बचाया जाए । पटाखों के शोर से ध्वनि प्रदूषण को बचाया जाए । बारूद ओं के झांसे पर्यावरण में छाती ना पहुंचाया ।। जाए ना पहुंचाया जाए ।। लेखक लाल बहादुर यादव

माँ दिवस

हर माँ की मन्नत होती मेरा इब्न हर बुलंदी को छुए बिना किसी बिरुध्द हर वक्त देखे बटुआ करे ना ख्वहिशों का नाश हर फ़ुवाद ब फ़हम से देती अहसासो़ का आदेश हर माँ करे साजदा-ऐ-ईबादत देख सके निकाह शादी कि रखती चाहत बची उम्र में खीला खेला सके कि करती मांग किसी माँ का दिल ना दुःखाना ऐ इन्सान 

जिंदगी एक किताब थी

किताबे काम न आयी जब जिंदगी इम्तिहान ले रही थी रोक न पायी कोई ताकत जब सांसे दामन छोड़ रही थी रंगीन सी दुनिया अंधेरो मे तब्दील हो गयी पर्दे गिरा कर आँखो के जब पलके बंद हो गयी रहा न कोई अपना न कोई पराया जब खुदा ने इस दुनिया से साथ छुड़ाया.. जब तक जिया खटका जिनकी आँखो मे मरते ही आँशु छलका उनकी भी आँखो मे एक के बाद एक ख्वाहिशो को पाना फिर भी न मिला जिंदगी का ठिकाना जब लाश पड़ी थी मेरी दो गज जमी पर एक दिन सब कुछ खाक मे मिलता है ये कहती मेरी राख पड़ी थी वही पर.. सारी उम्र शिकायतो मे उलझकर ये जिंदगी नही आसान समझकर जिंदगी जीने के लिए थी मैने ख्वाहिशो के नाम कर दी कुछ यू सुलझी सी जिंदगी मैने खुद ही बदनाम कर दी.. अभी हकीकत था अभी याद बन गया मरते ही देखो एक किताब बन गया जिंदगी एक किताब थी मैने जाना ही नही कभी एक पन्ना पीछे पलटू तो तकलीफे एक पन्ना आगे पलटू तो उलझने दिल के तार छुआ करती है मुस्कुरा कर जिया करु आज को तो जिंदगी खुशनुमा सी रहा करती है.. बिखराया करो अपनी मुस्कान हर एक पन्ने पर की तुम्हे पढ़कर मुस्कराये पढ़ने वाला इंसान भी तुम्हारी जिंदगी एक किताब थी जिसे पढेंगे लोग तुम्हारे मरने के बाद ही..!!