शादी की सालगिरह पर सुंदर कविता

हां बड़ी है अपने मां के गोद में
और खेली है पिता के छांव में
हर मांग पुरी कराती बहने
भाइयों के साथ संग खेली 
सहेलियो के संग कि आँख मिचोलि

नाचते गाते हो गई ब्याह के ढंग
8 मई 2017 को हल्दी में गई रंग
बड़े हर्ष उल्लास से बैठी अपने पति के संग
जगमगाती रही रोशनी अंबर और गगन
मात-पिता के तहजीब औ तोहीन की आदर्श

जोड़ी बनी रहे ऐसे ही करे सचिन सजदा
कवि को दी भतीजी खेले हमेसा हसदा
दया प्रेम स्नेह कि रखती तू प्यादा
इस शादी की सालगिरह पर,
आपको दिल से बधाई देते हैं,

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