हदसा
हमारे शहर में एक मोची था जिससे मै पहली बार मिला था और मिलते ही वो मेरे दिल में छा गया मै - भाई कितना कमा लेते हो मोची - कुछ नहीं भाई घर का खर्चा भी नहीं चलता मोची ही - देखता हूं बाहर जाऊंगा चंद पैसे कमाउंगा मां के जो गहने गिरवी हैं उनको भी छुड़ाऊगा जो लोगों से उधार ले रखा है उसे भी चुकाऊंगा फिर वो अगले ही दिन आपने एक बैग में कुछ कपड़े डाला मां के पैरों को छुआ और आपने ख्वाहिशों को दिल में दफन करके घर से निकल चला शहरों मे कमाने के लिए और अगले ही दिन में भी जा रहा था एक शहर की ओर जहां में पढ़ाई करने के वास्ते जा रहा था तो मुझे वह मोची स्टैंड पर ही मिला मोची - अरे भाई आप कहां जा रहे हो मै - बस यार जा रहा हूं कॉलेज मोची - चलो यार कम से कम कुछ दूर तक के तो साथी मिल गए पता नहीं आगे कोई मिलता है या भी नहीं पहचान का मोची की बातों मे मुझे बहुत ही मासूमियत झलक रही थी और उसकी बातें भी बड़ी निराली थी सच्ची में और उससे बातें करते-करते पता नहीं कब हमारा. बस स्टैंड आ गया वहीं से उसे रेलवे स्टेशन जाना था और मुझे भी अपने कमरे पे जाना था. मुझे और उसका मन नहीं भरा तो एक आधे घंटे उसके साथ बातें किया फि...