मेरी प्यारी सी लल्ली
मेरी प्यारी सी लल्ली, मुस्कुराती खाती उंगली ! तेरी हथेलियों पर लग जाती हैं बहुत सारी ओस !! आओ मैं तुम्हें गीत सुनाऊं, तुम फूलों सा इतराना ! जब मैं तुमसे लोरी कहूं, तब तुम हल्का सा मुस्काना !! आओ बेटी मैं तुम्हें अपने दोस्त अपनों से मिलाता हूं ! चलो मैं तुम्हें दुश्मनों परायो से मिलाता हूं !! तू एक नन्हीं सी तितली है ! तू इन हवाओं में, फिजाओं मैं मचलती है !! कभी तू अपने सचिन चाचू के सिर पर, तो कभी गुलाब के फूल पर चढ जाती है ! कभी तू गेहूं के रस को, तो कभी सरसों के फूलों के रस को चूसा करती है !! तेरी आंखों में बादलों की मेघ है, जब तेरी कोमल तन लड़ाई ले ! तब इन घटाओं में बारिश होती है !! तुम मेरी प्यारी सी बच्ची है, मैं तेरे लिए मिट्टी बन जाऊं ! तो उसमें खेला कर, तो कभी खा जाया कर !! यही सब करते मेरी प्याली बड़ी हो जाती है मैं कभी छुप जाऊं तो तू ढूंढा करती है ना मिलो तो फिर बैठ कर रोया करती है मैं जाकर जब देखूं तो तू खेला करती है 🙏✍️✍️writer L.B. MP 53✍️✍️🙏